चुटकी भण्डार राष्ट्रीय पाठशाला की स्थापना वर्ष 1921 में नागपंचमी के दिन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों द्वारा पूरे शहर से घरेलू महिलाओं के सहयोग से चुटकी भर आटा इकट्ठा करके की गई थी।
जब पहली बार इकट्ठा आटा बेचा गया तो वह आटा 64 रूपए 12 आना का बिका था, जिसकी मदद से विद्यालय के कमरों में छप्पर बनवाया गया था, जिसमें मुख्य भूमिका पंडित विश्वनाथ बाजपेई जी की थी एवं उनके स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का विशेष सहयोग रहा। इसमें सबसे छोटे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जिनकी आयु उस वक्त मात्र 10 वर्ष की थी और जिनको पूरा शहर ही नहीं पूरा प्रदेश श्री कृष्ण वर्मा जी के नाम से जानता है, जो आजादी के बाद लखनऊ शहर के डिप्टी मेयर के साथ विभिन्न सम्मानित पदों पर कार्यरत रहे।
वर्ष 1950 में पंडित विश्वनाथ बाजपेई जी द्वारा दो छप्पर वाले कमरों के विद्यालय की बागडोर श्री वर्मा जी को सौंपी गयी। श्री वर्मा जी के अथक प्रयासों से सर्वप्रथम इस विद्यालय की सीमा बढ़ाई गई। इनके प्रयासों से आज दो छप्पर वाले कमरों का विद्यालय दो भवनों में संचालित है, जिसमें आज कुल 48 कमरे हैं।
सर्वप्रथम श्री वर्मा जी ने वर्ष 1952 में हायर सेकेंडरी की मान्यता सरकार द्वारा करवाई। वर्ष 1954 में हाई स्कूल की मान्यता करवाई एवं वर्ष 1965 में विद्यालय को इंटर बोर्ड की मान्यता प्राप्त करवाई गयी। श्री कृष्ण वर्मा जी की लखनऊ शहर की छात्राओं को यह विद्यालय एक बहुत बड़ी भेंट है, जिसमें आज तक हजारों लाखों छात्राएं शिक्षा ग्रहण करके शिक्षित हुई एवं उच्च पदों पर आसीन हुईं।
प्रारंभ में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को जब यह ज्ञात हुआ कि लखनऊ शहर में इस प्रकार छात्र-छात्राओं के लिए अंग्रेजी हुकूमत के चलते यह विद्यालय बनाया गया है, तो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने इस ऐतिहासिक विद्यालय की चर्चा पूरे देश भर में की और देशवासियों को बताया कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो कोई भी कार्य असंभव नहीं है। साथ ही उन्होंने अपनी इच्छा व्यक्त की कि वह इस ऐतिहासिक विद्यालय के दर्शन जरूर करेंगे और सभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को इस विद्यालय को बनाने के लिए बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाओं के साथ ही छोटे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बालक श्री कृष्ण वर्मा जी का विशेष उत्साह वर्धन किया।
- सरोजनी नायडू जी इस विद्यालय में आईं, जो उत्तर प्रदेश की पहली महिला गवर्नर रहीं।
- श्री सी.बी. गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार, ने विद्यालय की प्रबंध समिति के कार्यकारिणी सदस्य रहते हुए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
- पूर्व नगर प्रमुख स्व. दाऊजी गुप्ता जैसी महान विभूतियों ने विद्यालय की प्रबंध समिति में रहकर विद्यालय का मान बढ़ाया।